Chief of Defense Staff Kya hai | चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ क्या है?

क्यों जरूरी है, सेना में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ पद ?

73वें स्वतंत्रता दिवस पर मोदी जी ने तीनों सेनाओं पर एक, ‘Chief of Defense Staff’ पद की घोषणा की गई। जानिए क्यों जरूरी है, सेना में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ पद ?

प्रधानमंत्री मोदी ने 73वें स्वतंत्रता दिवस के भाषण में तीनों सेनाओं के पक्ष में बड़ा ऐलान किया गया। उन्‍होंने अपने भाषण में कहा, कि देश को सेना पर गर्व है।

Chief of Defense Staff ki Aavashyakta Kya hai | चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की आवश्‍यक्‍ता क्‍या है?

उन्‍होंने समय की मांग पर तीनों सेनाओं को एक साथ मिलकर काम करने की आवश्‍यकता पर बल दिया गया।

इस दौरान उन्‍होंने भारतीय सेना में एक नए पद की आवश्‍यक्‍ता पर जोर दिया गया।

उन्‍होंने  कहा, कि किसी कार्यवाही के दौरान यदि किन्हीं कारणवश थल सेना पीछे रह जाती है, तो यह देश हित में नहीं है।

इसलिए तीनों सेनाओं का एक सेनापति Chief of Defense Staff की घोषणा की गई।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में आतंकवाद के मुद्दे पर जमकर हमला बोला गया।

उनके द्वारा अपने भाषण में दुनिया का प्रत्‍येक हिस्‍से को आतंकवाद से ग्रसित बताते हुए आतंकवाद पर भारत को मूकदर्शक की भूमिका नहीं निभाने की बात कही गई।

उन्‍होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत की अपनी लड़ाई आवश्यक रूप से जारी रखने तथा आतंकवाद को एक्सपोर्ट करने वालों को बेनकाब करने की बात कही गई।

उन्होंने अपने भाषण में भारत के अलावा श्रीलंका, बांग्लादेश तथा अफगानिस्तान को भी आतंकवाद से ग्रसित बताया गया।

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Chief of Defense Staff पद पर नियुक्ति हेतु वरिष्ठता होगा आधार

Chief of Defense Staff हेतु वरिष्ठता होगा आधार

जानकारी के अनुसार भारतीय सेना में केन्‍द्र सरकार के फैसले के बाद Chief of Defense Staff का पद अस्तित्व में आ जाएगा।

इस पद को भरने हेतु एक कमेटी के गठन की संभावना व्यक्त की जा रही है। कमेटी आगामी 2 महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।

कमेटी अपनी रिपोर्ट में Chief of Defense Staff पद की शक्तियां तथा जिम्‍मेदारी पर फैसला लिया जाएगा।

अनुमान यह भी लगाया जा रहा है, कि नया सृजनित किया गया सीडीएस पद तीनों सेनाओं के मुखिया से बड़ा होगा।

डिफेंस स्टाफ चीफ या सीडीएस पद की आवश्यकता क्यों ?

भारत जैसे विशाल देश में रक्षा मंत्रालय में मिलिट्री प्रोफेशनल्स के स्थान पर बिना मिलिट्री बैकग्राउंड वाले ब्यूरोक्रेट्स कार्यभार संभाल रहे थे।

इसके परिणाम स्वरूप तीनों सेनाओं में अक्सर तालमेल की कमी देखी गयी। इसका कई जीते जागते उदाहरण देखने को मिलते हैं।

  • प्रथम उदाहरण के तौर पर वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध को ले सकते हैं। इस युद्ध में भारतीय वायु सेना को किसी भी प्रकार का कार्य नहीं सौंपा गया था, जबकि यदि भारतीय वायु सेना इस युद्ध में हिस्सा लेती तो परिणाम कुछ और ही होते।

दूसरे उदाहरण के तौर पर वर्ष 1965 में भारत और पाकिस्तान के मध्य हुआ युद्ध है। इस युद्ध में भारतीय थल सेना द्वारा पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर को तीनों ओर से हमला करने की योजना बनाई गई थी, परन्‍तु इसकी सुचना तक भारतीय नौसेना को नहीं दी गई थी।

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भारतीय सेना में सीडीएस पद के सृजन की यात्रा

वर्ष 1999 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के कार्यकाल के दौरान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद की आवश्यकता महसूस की गई।

सुब्रह्मण्यम स्वामी के नेतृत्व वाली कारगिल समीक्षा समिति द्वारा सीडीएस पद हेतु प्रमुख रूप से सिफारिश की गई थी,

परंतु उस दौरान विपक्ष की भूमिका वाली कांग्रेसी सरकार ने सीडीएस के हाथों में इतनी अधिक सैन्य ताकत प्रदान करने के विरोध किया गया।

तत्‍पश्‍चात पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में भी इस संबंध में नरेश चंद्र समिति का गठन किया गया।

इसके बाद मोदी सरकार द्वारा रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल डी बी शेकटकर की अध्यक्षता में 11 सदस्यी समिति का गठन किया गया।

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रक्षा मंत्रालय ने गठित की 4 सदस्‍यी समिति

रक्षा मंत्रालय ने Chief of Defense Staff यानी (सीडीएस) की नियुक्ति के लिए वर्तमान में 4 सदस्य समिति का गठन किया गया है।

यह समिति 90 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।

इस समिति में रक्षा सचिव तथा चीफ ऑफ इंटीग्रेटिज डिफेंस स्टाफ टू द चेयरमैन, चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी (सीआईएससी) के अलावा दो और अन्य सदस्यों को स्‍थान दिया गया है।

इस समिति का मुख्य कार्य सीडीएस की भारतीय सेना में भूमिका, दायित्व तथा उसकी शक्तियों की बारे में रूपरेखा तैयार करना है।

इस पद के अस्तित्‍व में आने के बाद भारतीय सेना के ऊपर खर्च होने वाले रक्षा बजट का भी आवश्यक तथा बेहतर तरीके से उपयोग किया जा सकेगा।

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सीडीएस के पद के सृजन होने के बाद सेना को मिलेगा विशेष लाभ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने भाषण में तीनों सेनाओं के लिए एक ही चीफ ऑफ डिफेंस प्रमुख की घोषणा की गई।

इस घोषणा को भारतीय सेना के लिए अभी तक का सबसे बड़ा सुधार के रूप में देखा जा रहा है।

केन्‍द्र सरकार के इस फैसले के बाद Chief of Defense Staff का पद अस्तित्व में आ जाएगा।

इसके परिणाम स्‍वरूप देश की सेना को और अधिक मजबूती प्राप्त होगी।

इसके अलावा तीनों सेनाएं एक साथ मिलकर काम करने में सझम होंगी।

भारत की तीनों सेनाएं एक ही व्‍यक्ति के नेतृत्व में कार्य करने के दौरान बेहतर तालमेल के साथ कार्य करने में सझम होंगी।

इसके परिणाम स्‍वरूप तीनों सेनाओं में मौजूद संसाधनों का उचित इस्तेमाल भी किया जा सकेगा।

आज भारतीय सेना दुनिया में सबसे बड़ी सेना में से एक पहचानी जाती है ।

समय की मांग थी चीफ Chief of Defense Staff पद

अंतत: भारतीय सेना की तीनों इकाईयों को कोर्डिनेशन के साथ किसी मिशन में एक साथ लाने की व्‍यवस्‍था की गई है।

इस हेतु महत्‍वपूर्ण कमांडिंग आफीसर का पद Chief of Defense Staffके सृजन करने का फैसला केन्‍द्र सरकार द्वारा किया गया।

इस पद की आवश्यकता समय-समय पर इसमें महसूस की जाती रही है।

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