UAPA Amendment Bill 2019 UPSC | UAPA अमेन्डमेंट बिल 2019 यूपीएससी

विधि विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) संशोधन विधेयक (UAPA), 2019

देश के विरूद्ध आतंकी गतिविधियों मे शामिल लोगों के खिलाफ कार्यवाही हेतु केन्द्रत सरकार ने UAPA अमेन्डनमेंट बिल 2019 या गैरकानूनी गतिविधियां संशोधन विधेयक, 2019 संसद में पेस किया।

देश में आतंकी गतिविधियों एवं देश के विरूद्ध की गई साजिशों के खिलाफ कार्यवाही करने हेतु तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार द्वारा वर्ष 1967 में सर्वप्रथम विधि विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) विधेयक, 1967 को संसद से पास कर कानून का रूप दिया गया था।

समय-समय पर सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकारों द्वारा इसमें आवश्यक संशोधन किए जाते रहे। इस विधेयक में वर्ष 2004, 2008 एवं 2013 में संशोधन कर इसे मजबूत कानून बनाने का कार्य किया गया।

इस विधेयक में वर्ष 2004, 2008 एवं 2013 में संशोधन कर इसे मजबूत कानून बनाने का कार्य किया गया।

इसी कड़ी में वर्तमान मोदी सरकार ने समय की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2019 को लोकसभा में 8 जुलाई 2019 को पेश किया गया।

जिसे 8 वोटों की अपेक्षा 287 वोटों से लोकसभा से पारित कर दिया गया।

लोकसभा में पास हाने के उपरांत UAPA अमेन्डनमेंट बिल 2019 राज्यसभा में 2 अगस्त 2019 को पेश किया गया।

जहॉं यह विधेयक 42 के मुकाबले 147 वोटों से पारित कर दिया गया।

राज्यसभा से पारित विधेयक पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने के बाद यह पुराने कानून का स्‍थान लेगा।

राज्यसभा में इस बिल के पेश होने के उपरांत विपक्ष द्वारा इसे सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने का प्रस्ताव रखा गया था।

सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने के प्रस्ताव पर हुई वोटिंग में पक्ष में 85 तथा विपक्ष में 287 वोट पड़े।

इसके परिणाम स्‍वरूप यह प्रस्ताव राज्‍यसभा में गिर गया, तथा इसे सेलेक्‍ट कमेटी के पास नहीं भेजा गया।

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क्या है, UAPA Amendment Bill 2019?

UAPA Amendment Bill 2019

केंद्र की मोदी सरकार द्वारा पारित एंटी टेरर बिल, जिसे UAPA Amendment Bill 2019 के नाम से भी जाना जाता है, का पूरा नाम विधि विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) संशोधन विधेयक, 2019 या Unlawful Activities Prevention amendment Act (UAPA), 2019 है ।

मोदी सरकार ने देश में बढ़ते हुए आतंकवाद से कड़ाई से निपटने के उद्देश्य से पूर्व के UAPA Amendment Bill 2019 में कुछ आवश्यक तथा विशिष्ट संशोधन के साथ लोकसभा में पेश किया गया।

संसद के दोनों सदनों से पास होने के उपरांत यह बहुत ही मजबूत होकर निकला है।

यदि हम आजादी के बाद का इतिहास देखें तो हम पाते हैं, कि हमारा देश आतंकवाद से बुरी तरह से प्रभावित रहा है।

कहीं आतंकी सक्रिय हैं तो कहीं नक्सलवाद, इन दोनों के बीच में आम आदमी पिस्ता जा रहा है।

इसके अलावा देश विरोधी गतिविधियों में लोगों की संलिप्तता बढ़ती जा रही है।

ऐसे मनोवृति वाले भी काफी लोग मौजूद हैं, जो इन्हें आर्थिक, सामाजिक तथा धार्मिक आधार पर पूर्ण रूप से सहायता करते हैं।

मजबूत कानून ना होने की वजह से इस प्रकार के लोग आसानी से जांच ऐजेंसियों के दायरे से निकल आते हैं।

इसी का परिणाम है, कि आज पढ़े लिखे लोग भी बड़ी मात्रा में इस रास्ते पर चल पड़े हैं।

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गैरकानूनी गतिविधियां संशोधन विधेयक, 2019 में प्रमुख संशोधन

नवीन संशोधित UAPA Amendment Bill 2019 में केंद्रीय जांच एजेंसियों को और अधिक ताकतवर बनाया गया है।

इस नवीन संशोधित UAPA अमेन्डनमेंट बिल 2019 अथवा गैरकानूनी गतिविधियां संशोधन विधेयक, 2019 के तहत निम्न प्रावधान किए गए हैं, जिसके आधार पर विभिन्न परिस्थितियों में पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियां कार्यवाही कर सकेंगी।

  • कोई व्यक्ति अथवा संगठन का यदि आतंकवाद से जुड़े किसी मामले में किसी प्रकार से सम्मिलित होना पाया जाता है, तो उसे आतंकवादी या आतंकवादी संगठन घोषित किया जा सकेगा।
  • एंटी टेरर बिल, 2019 के नवीन प्रावधानों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति या संगठन आतंकवाद की तैयारी करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे आतंकवादी घोषित किया जा सकेगा।
  • इसमें यह भी प्रावधान किया गया है, कि यदि कोई व्यक्ति या संगठन आतंकवाद को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा देता हुआ पाया जाता है, तो उसे भी आतंकवादी घोषित किया जा सकेगा।
  • UAPA अमेन्डनमेंट बिल 2019 में नवीन संशोधन के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति या संगठन आतंकवादी गतिविधियों में किसी अन्य प्रकार से संलिप्त पाया जाता है, तो उसे भी आतंकवादी घोषित किया जा सकेगा।
  • इस संशोधित विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है, कि सरकार किसी भी व्यक्ति या संगठन को शक के दायरे में आने पर व्यक्तिगत तौर पर आतंकवादी घोषित कर सकेगी।
  • UAPA अमेन्डनमेंट बिल 2019 में इस बात का भी उल्लेख किया गया है, कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के जांच अधिकारी द्वारा आतंकवाद से संबंधित किसी भी मसले पर एनआईए महानिदेशक की अनुमति के आधार पर संबंधित व्यक्ति या संगठन की संपत्ति को जप्‍त/कुर्की की कार्यवाही की जा सकेगी।

जबकि इससे पूर्व किसी भी राज्य में यदि कोई आतंकवाद से जुड़ा मामला पाया जाता था, तो उसकी संपत्ति को जप्त करने की कार्यवाही से पूर्व संबंधित राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से अनुमति लेना आवश्यक था।

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Unlawful Activities Prevention amendment Act, 2019 से राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की ताकत बढ़ी!

एंटी टेरर बिल, 2019 या Unlawful Activities Prevention amendment Act (UAPA), 2019 के अनुसार राष्ट्रीय जांच एजेंसियों (NIA) को अधिक ताकत प्रदान की गई है। जिससे उनकी ताकत 4 गुना बढ़ जाएगी।

नवीन UAPA Amendment Bill 2019 में राष्ट्रीय जांच एजेंसियों को असीमित अधिकार प्रदान किए गए हैं।

इसके परिणाम स्वरूप राष्ट्रीय जांच एजेंसी बिना किसी रुकावट के स्वच्छंद रूप से किसी के खिलाफ़ भी जांच करने में सक्षम होंगी।

  • नई संशोधित कानून में आतंकवाद या उससे संबंध रखनेवाले किसी भी व्यक्ति या संगठन के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) जांच कर सकेगी तथा उस व्यक्ति या संगठन से संबंधित किसी भी प्रकार की संपत्ति को कुर्क/जप्त कर सकेगी।
  • इसके लिए उसे केवल राष्ट्रीय जांच एजेंसी के महानिदेशक की ही अनुमति की आवश्यकता होगी।
  • Unlawful Activities Prevention amendment Act (UAPA), 2019 से पूर्व किसी भी आतंकवादी केस में जांच करने के दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसियों को व्यक्ति या संगठन की संपत्तियों को जब्त करने के लिए संबंधित राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से अनुमति लेने की आवश्यकता होती थी, परंतु नए कानून में यह अधिकार सीधे तौर पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी के महानिदेशक को प्रदान किये गये हैं।
  • इस नवीन एंटी टेरर संशोधित विधेयक 2019 के पूर्व आतंकवाद के मामलों में जांच करने हेतु जांचकर्ता अधिकारी राज्य के डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीजीपी) या असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (एसीपी) रैंक के अधिकारी हुआ करते थे, परंतु नवीन संशोधन के उपरांत आतंकवाद से संबंधित किसी भी मामले की जांच एनआईए के इंस्पेक्टरों या उससे ऊपर रैंक के अधिकारी आसानी से कर सकेंगे।

इस नवीन UAPA Amendment Bill 2019 में यह भी प्रावधान किया गया है, कि किसी भी राज्य में आतंकवाद से संबंधित गतिविधियों में संलिप्त या शक के दायरे में आए हुए व्यक्ति के खिलाफ एनआईए कार्यवा‍ही करते हुए उसे गिरफ्तार करने में सक्षम होगी तथा संबंधित व्यक्ति या उसके संगठन को आतंकवादी घोषित कर सकेगी।

इसके लिए उसे संबंधित राज्य की पुलिस से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

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विधि विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) विधेयक, 2019 की आवश्यकता क्यों ?

देश में युवा वर्ग को बहलाने-फुसलाने का कारोबार बड़े जोरों से चल रहा है।

देश के खिलाफ कार्य करने वाले लोगों द्वारा इनको कभी पैसों का लालच देकर, तो कभी धर्म को सहारा लेकर देश के खिलाफ तैयार किया जाता है।

इस कारण बड़ी संख्या में अनपढ़ के अलावा पढ़े लिखे लोग भी जाने अनजाने में आतंकवाद के रास्ते पर चल पड़ते हैं।

आतंकवाद के खिलाफ कड़ा कानून न होने की वजह से लोगों में कानून के प्रति किसी भी प्रकार का भय व्याप्त नहीं है।

इसी को देखते हुए केंद्र की मोदी सरकार ने पुराने कानून में संशोधन कर उसे और अधिक मजबूती प्रदान की गई है।

  • राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की कार्यवाहियों के विशलेषण करने पर पता चलता है, कि एनआईए द्वारा दायर आतंकवाद के कई प्रकरणों में कमजोर कानून के वजह से संबंधित व्यक्ति के खिलाफ समय पर सबूत इकट्ठे न हो पाने से वे आसानी से बरी हो गए।
  • बहुत से प्रकरण ऐसे भी पाए गए, जिनमें देश के विभिन्न राज्यों में आतंकी गतिविधियों में संलिप्‍त व्यक्तियों या संगठनों के खिलाफ एनआईए द्वारा कार्यवाही किए जाने के रास्ते में राज्य सरकारों द्वारा या तो अनुमति नहीं दी गई या जांच में व्यवधान उत्पन्न किया गया।
  • राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त पाए गए संगठन को प्रतिबंधित किए जाने के उपरांत उनके द्वारा नाम बदलकर दोबारा अपनी गतिविधियां जारी रखी गईं।
  • परिणाम स्‍वरूप इन नवीन संगठन या उससे संबंधित व्‍यक्तियों द्वारा देश में आतंकवाद या देश विरोधी मुहिम दुबारा आसानी से चलाई गई।
  • इसके पीछे की वजह संबंधित कमजोर कानून रहा, जिससे संबंधित के खिलाफ पर्याप्‍त सबूत नहीं प्राप्‍त हो सके।

इस तरह से यह कहा जा सकता है, कि UAPA Amendment Bill 2019 कानून लोगों को देश के खिलाफ जाने से रोकने में या आतंकवाद के रास्ते पर लोगों की संलिप्तता को काफी हद तक कम करने में कामयाब रहेगा।

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गैरकानूनी गतिविधियां संशोधन विधेयक, 2019 कानून का आम आदमी पर पढ़ने वाले प्रभाव

मोदी सरकार द्वारा विधि विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) विधेयक 2013 में संशोधन कर इसका नवीनीकरण किया गया है।

इस संशोधन के उपरांत यह कानून बहुत ही मजबूत बन गया है।

इस कानून के दायरे में प्रत्येक व्यक्ति या संगठन आएगा, जो देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पाया जाएगा।

  • नवीन UAPA अमेन्डनमेंट बिल 2019 केंद्र सरकार को विशिष्ट अधिकार प्रदान करेगा, जिसके आधार पर सरकार किसी भी व्यक्ति या संगठन को शक के दायरे में आने पर आंतकवादी करार दे सकेगी।
  • परंतु मोदी सरकार ने इस नवीन संशोधित विधेयक में इसका भी विशेष ध्यान दिया है, कि इस कानून का गलत इस्तेमाल न किया जा सके।

किसी व्यक्ति को आतंकवाद के केस में पकड़ कर उसे आतंकवादी घोषित किया जाता है, तो उस व्यक्ति के पास भी चार स्तर पर स्क्रुटनी करने का विकल्प होगा।

इसके अलावा नवीन कानून में एक रिव्यू कमेटी का भी गठन करने की बात कही गई है। इस कमेटी के चेयरमैन हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज को बनाया जाएगा।

इनको अधिकार होगा, कि वह संबंधित व्यक्ति के आतंकवादी समझे जाने पर अपना फैसला सुना सके।

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विधि विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) विधेयक, 2019 के दुरुपयोग की संभावना

इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है, कि इतना मजबूत कानून बनाने के उपरांत इसका दुरुपयोग नहीं होगा।

किसी भी देश में कानून देश को शांतिपूर्ण ढ़ंग से चलाने एवं देश में सुचारू व्यवस्था बनाए रखने के लिए बनाया जाता है,

जिससे लोगों को किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न ना हो। लेकिन इसके विपरीत यह पाया गया है, कि कानून के ठेकेदार ही इसका दुरुपयोग करते हैं।

वर्तमान एंटी टेरर बिल, 2019 सरकार तथा केंद्रीय जांच एजेंसियों को असीमित अधिकार व ताकत प्रदान करता है।

  • यह कानून कई मायने में अपनी व्यक्तिगत या जातिगत दुश्मनी निकालने का माध्यम बन सकता है। इसके अलावा इस कानून से भ्रष्टाचार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है, क्योंकि इसमें यह व्यवस्था की गई है, कि केवल शक के दायरे पर आप किसी भी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित कर सकते हैं।
  • नवीन कानून का सहारा लेकर यदि किसी भी व्यक्ति को एक बार आतंकवादी घोषित कर दिया गया और उसके खिलाफ केस दर्ज होने के उपरांत 5 से 10 साल बाद निर्दोश पाये जाने पर बरी किया गया, तो इस कानून में कहीं भी इसका उल्लेख नहीं किया गया है, कि संबंधित व्यक्ति की शारीरिक, मांसिक पीड़ा के अलावा बदनामी तथा उसके जीवन के बहुमूल्य वर्षों का जिम्मेदार कौन होगा ?
  • इसके अलावा प्राय: यह भी देखा गया है, कि सरकारें अपने राजनैतिक फायदे के लिए जांच एजेंसियों का दुरूपयोग करती हैं।
  • यह कानून एनआईए को असीमित ताकत तो प्रदान करती है, साथ ही सत्तारूढ़ केंद्र सरकार को भी असीमित अधिकार प्रदान करता है।
  • इसी आधार पर इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता, कि सरकार अपने विरोधियों के दमन हेतु इसका प्रयोग नहीं करेगी।

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