Lok Sabha Ka Gathan Kaise Hota Hai

Lok Sabha Ka Gathan Kaise Hota Hai Hindi| लोकसभा का गठन

संविधान के अनुसार संसद लोकसभा, राज्यसभा तथा राष्ट्रपति से मिलाकर बनती है। Lok Sabha संसद का निम्न सदन कहलाती है। Lok Sabha Ka Gathan Kaise Hota Hai? आइए जानते हैं. इन दोनों सदनों के अलावा इसका तीसरा स्‍तम्‍भ देश का राष्‍ट्रपति है। इन तीनों के सामूहिक रूप को ही संसद कहते हैं। लोकसभा संसद का द्वितीय तथा निम्‍न सदन होता है।

इसके सदस्यों का निर्वाचन व्यस्क मताधिकार से आम चुनावों के माध्‍यम से जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से किया जाता है।

Lok Sabha: संसद का निम्‍न सदन 

संविधान के अनुच्छेद 88 (2) के अंतर्गत सामान्यतः Lok Sabha सदन का कार्यकाल 5 वर्ष निहित किया गया है। इसका तात्‍पर्य यह है, कि प्रत्‍येक पांच वर्ष पूर्ण होने पर इसके सदस्‍यों का चुनाव प्रत्‍यक्ष रूप से आम चुनाव के माध्‍यम से जनता द्वारा पुन: चुने जाऐंगे। इसका कार्यकाल पूर्ण होने पर मंत्रीमंडल के परामर्श से लोकसभा सदन, राष्‍ट्रपति द्वारा भंग कर दिया जाता है। आपातकाल की स्थिति में देश की सांसद के कार्यकाल को विधि द्वारा बढ़ाने की शक्ति प्रदान की गई है।

Lok Sabha Ka Gathan Kab Hua?

संसद विधि द्वारा एक बार में बढ़ाई गई अवधि 1 वर्ष से अधिक नहीं हो सकेगी। इस उद्घोषणा के प्रवर्तन में न रहने के पश्चात Lok Sabha का कार्यकाल किसी भी दशा में 6 माह की अवधि से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकेगा। हमारे देश में सर्वप्रथम पहले आम चुनाव संपन्न होने के बाद 17 अप्रैल 1952 को देश की पहली Lok Sabha Ka Gathan(लोकसभा का गठन) किया गया। लोकसभा के सदस्यों का चुनाव सीधे जनता के द्वारा किया जाता है। देश की संसद द्वारा संविधान में उल्‍लेखित दिशा-निर्देशों के आधार पर लोकसभा क्षेत्र का निर्धारण किया जाता है।

लोकसभा के अंदर सदन में होने वाली कार्रवाई का सीधा प्रसारण Lok Sabha के स्वयं की टीवी चैनल पर किया जाता है। संविधान द्वारा संसद भवन के अंदर किसी भी मीडिया कर्मी को जाने की अनुमति नहीं दी है। वर्तमान में वर्ष 2014 में 16वीं Lok Sabha Ka Gathan(लोकसभा का गठन) किया गया था, जो अभी भी जारी है। वर्ष 2019 में होने वाले अगामी लोकसभा चुनाव 17वीं लोकसभा के गठन हेतु किये जाएंगे।

Lok Sabha Me Kitne Sadasya Hote Hain

संविधान निर्माताओं द्वारा Lok Sabha सदन हेतु कुल 552 सीटें निर्धारित की गई हैं। इनमें से 530 सीटें भारत के विभिन्न राज्यों के क्षेत्रों से आम चुनाव द्वारा भरी जाती हैं। जिनका निर्धारण जनसंख्या के अनुपात के आधार पर किया जाता है। शेष 20 सदस्य  देश के राष्ट्रपति द्वारा, केंद्र शासित प्रदेश से चुने जाते हैं। इन 552 सीटों में 2 सीट भारतीय आंग्ल समुदाय के लिए आरक्षित की गई हैं।

जब कभी इन 2 सीटों का प्रतिनिधित्व Lok Sabha में नहीं होता है, तो राष्ट्रपति द्वारा इनको मनोनीत किया जाता है। संविधान द्वारा लोकसभा की 131 सीटों में से 84 सीटों को अनुसूचित जाति सदस्यों हेतु आरक्षित किया गया है तथा इसके अलावा 43 सीटें अनुसूचित जनजाति सदस्यों के लिए आरक्षित की गई हैं।

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Lok Sabha Kshetra का निर्धारण

Lok Sabha के सदस्यों का चुनाव सीधे जनता द्वारा निर्वाचन के माध्यम से किया जाता है। इसके लिए प्रदेश को प्रादेशिक निर्वाचन में संविधान के अनुसार दो तरीकों से लोकसभा क्षेत्रों को बांटा जाता है:-

  • संविधान में व्यवस्था की गई है, कि सभी प्रदेशों में लोकसभा सीटों का आवंटन करने के दौरान यह ध्यान रखा जाए, कि लोकसभा की सीट तथा जनता का अनुपात सभी राज्यों में एक समान हो।
  • संविधान के अनुसार यदि किसी प्रदेश की जनसंख्या 60 लाख से कम पाई जाती है, तो संबंधित राज्य में यह प्रावधान लागू नहीं किया जाएगा।
  • संविधान में प्रत्येक राज्यों में Lok Sabha निर्वाचन क्षेत्र की जनसंख्या तथा आवंटित सीटों का अनुपात पूरे राज्य में एक समान होना सुनिश्चित किया गया है।

लोकसभा सदस्य Hetu Nirdharit Yogyatayen

संविधान के अनुच्छेद 84 में देश के किसी भी नागरिक को लोकसभा का सदस्य बनने के अधिकार प्रदान करते हुए संबंधित व्‍यक्ति के पास निम्नलिखित अहर्ताओं को अनिवार्य किया गया है| Niche Pade Lok Sabha Ka Gathan ke baad लोकसभा सदस्य Hetu Nirdharit Yogyata Yen

  • सर्व प्रथम Lok Sabha का सदस्य बनने हेतु व्यक्ति के पास भारत का नागरिता होना अनिवार्य किया गया है।
  • उसे निर्वाचन आयोग द्वारा निमित्त अधिकृत व्यक्ति के साथ तीसरी अनुसूची के आधार पर संबंधित प्रयोजन हेतु दिए गए प्रारूप के अनुसार शपथ अथवा प्रतिज्ञा करने के अलावा उस पर अपने हस्ताक्षर करना भी अनिवार्य किया गया है।
  • लोकसभा सदस्य हेतु निर्वाचित होने के लिए संबंधित व्यक्ति को न्यूनतम आयु (25 वर्ष) पूर्ण की जानी चाहिए।
  • Lok Sabha चुनाव के लिए खड़े होने वाले व्यक्ति या उम्मीदवार का आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए।
  • अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति को किसी लाभ के पद पर नहीं होना चाहिए।
  • लोकसभा चुनाव के उम्मीदवार का नाम देश के किसी भी हिस्से में मतदाता सूची में होना अनिवार्य किया गया है।
  • Lok Sabha सदस्य के चुनाव में खड़े होने वाले उम्मीदवार के लिए संविधान में यह निर्देशित किया गया है, कि वह व्यक्ति एक समय में 2 जगह से अधिक चुनाव के लिए नहीं खड़ा हो सकता है।

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Lok Sabha Ka Gathan

Lok Sabha Ka Gathan आम चुनाव के माध्‍यम से सीधे भारतीय जनता द्वारा व्‍यस्‍क मताधिकार के प्रयोग से लोकसभा सदस्यों का चुनाव करते हुए किया जाता है। चुनाव के दौरान प्रत्येक पार्टी द्वारा अपना उम्मीदवार संबंधित Lok Sabha क्षेत्र से खड़ा किया जाता है।

जिन व्यक्तियों को किसी पार्टी द्वारा टिकट नहीं दिया जाता है, देश के संविधान ने उन्हें निर्दलीय रूप से चुनाव लड़ने की शक्तियां प्रदान की हैं। हमारा भौगोलिक दृष्टि से भिन्‍नताओं वाला विशाल देश है। इसकी वजह से Lok Sabha का चुनाव संसाधनों की कमी होने की वजह से एक साथ कराना संभव नहीं हो पाता है।

इसके परिणाम स्वरुप लोकसभा का चुनाव कई चरणों में किया जाता है, जो लगभग 2 महीने तक चलता है। देश में चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही निर्वाचन आयोग द्वारा आचार संहिता लगा दी जाती है। आचार संहिता लगने पर प्रशासनिक शक्तियां निर्वाचन आयोग के अधीन हो जाती हैं।

इसकी वजह से निर्वाचन आयोग के पास किसी भी अधिकारी अथवा कर्मचारी के ट्रांसफर, निलंबन आदि की शक्तियां पहुँच जाती हैं। आचार संहिता के दौरान वर्तमान सरकार द्वारा देश में किसी भी प्रकार की योजनाएं, विज्ञप्ति आदि अन्य चीजें लागू नहीं की जा सकती हैं।

Current Lok Sabha Adhyaksh 2020 Name: Om Birla

Lok Sabha Adhyaksh Om Birla

Lok Sabha Adhyaksh Ke Karya Evam Shaktiya in Hindi

चुनाव प्रक्रिया पूर्ण होने के उपरांत निर्धारित तिथि पर परिणाम घोषित किए जाते हैं। घोषित परिणामों में सर्वाधिक बहुमत पाने वाले दल को देश के संविधान के अनुसार देश के राष्ट्रपति के समक्ष सरकार बनाने का दावा प्रस्तुत किया जाता है। जिसके आधार पर राष्ट्रपति द्वारा सरकार बनाने  हेतु उसी दल को आमंत्रित किया जाता है।

इसके उपरांत बहुमत प्राप्‍त दल द्वारा Lok Sabha Ka Gathan(लोकसभा का गठन) करने हेतु सरकार बनाने के लिए निर्धारित तथा आवश्‍यक उम्मीदवारों की सूची राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत की जाती है। उसी दौरान सदस्‍यों में से एक व्‍यक्ति को अपना नेता चुना जाकर देश का प्रधानमंत्री घोषित किया जाता है।

लोकसभा सीट के रिक्‍त होने के कारण

संविधान में नीहित दिशा-निर्देशानुसार निम्न परिस्थितियों में लोकसभा सीट को खाली समझकर उस रिक्‍त सीट को भरने हेतु दोबारा चुनाव कराया जाएगा। संबंधित क्षेत्र से चुने हुए लोकसभा सदस्य द्वारा यदि किन्ही कारणों से अपनी सदस्यता से स्पीकर को इस्तीफा सौंपा जाता है।

लोकसभा सदस्य के बिना किसी नोटिस के लगातार 60 दिनों तक संसद से अनुपस्थित होने पर उसकी सीट रिक्त समझी जाएगी। यदि किसी संसद सदस्य द्वारा दल बदल कानून का उल्‍लंघन करते हुए अपनी पार्टी से स्‍तीफा देकर दूसरे दल में शामिल हो जात है, इस स्थिति में उसकी सीट को खाली समझा जाएगा।

संसद सदस्य की आकस्मिक मृत्यु होने पर संविधान के अनुसार संबंधित लोकसभा सीट के खाली होने की स्थिति में रिक्‍त सीट को भरने हेतु दोबारा चुनाव कराया जाएगा।

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