चुनाव खर्च एवं क्राउडफंडिंग का चलन


 

देश में चुनाव आयोग द्वारा लोकसभा चुनावों के दौरान होने वाले खर्च की अधिकतम सीमा 70 लाख रखी की गई है। देखा जाए तो यह राशि बहुत अधिक है, परंतु बड़ी पार्टियों के लिए यह राशि कुछ भी नहीं है। इनके मुकाबले छोटी पार्टियों के प्रत्याशियों द्वारा चुनाव में होने वाले खर्चे के लिए पैसे जुटाना बड़ी ही मुश्किल का काम है।

 

 

पिछले कई दशकों से तथा आज वर्तमान में भी जब कभी देश में चुनाव कराए जाते हैं, तो विभिन्न पार्टियों अथवा प्रत्याशियों द्वारा प्रयोग किए जाने वाले काले धन की चर्चा अक्सर सुनाई देती है। वर्तमान लोकसभा चुनाव 2019 में भी इसकी चर्चा सुनाई दे रही है। देश में जगह-जगह चुनाव आयोग की ओर से दी गई दबिस में करोड़ों रुपए जप्‍त किए जा रहे हैं। यह पैसे ज्‍यादातर प्र‍त्‍यासियों के सगे संबंधी या कार्यकर्ताओं या अन्‍य व्‍यक्तियों के पास से बरामद हो रहे हैं, जिनका कोई हिसाब नहीं दिया जाता है। इतनी बड़ी तादाद में धन मिलना कहीं ना कहीं हमारे देश में भ्रष्ट राजनीति की ओर इशारा करता है।

इसी को देखते हुए चुनाव आयोग द्वारा इस संबंध में कड़े निर्देश जारी किये गए हैं। चुनाव आयोग द्वारा ₹20,000/- रूपए से अधिक का चंदा मिलने पर किसी भी राजनीतिक पार्टी अथवा प्रत्याशी को दानदाता का पूरा नाम, पता तथा फोन नंबर आदि की जानकारी मांगे जाने पर चुनाव आयोग को उपलब्‍ध कराने का निर्देश जारी किया गया है।

इन सभी समस्याओं से बचने के लिए विभिन्न राजनीतिक पार्टियों अथवा उनके उम्मीदवारों द्वारा चुनाव खर्च हेतु धन इकट्ठा करने के लिए ऑनलाइन वेबसाइटों का सहारा लिया जा रहा है। इन पोर्टलों पर जाकर कोई भी दानदाता अपनी जानकारी शेयर करते हुए ऑनलाइन फंड पार्टी के अकाउंट में जमा करा सकता है ऑनलाइन प्‍लेटर्फाम के माध्‍यम से किसी कार्य के लिए धन इकट्ठा करना ही क्राउडफंडिंग कहलाती है।

ऑनलाइन माध्‍यम से राजनीतिक पार्टी अथवा प्रत्याशियों द्वारा चुनाव कार्यों हेतु धन प्राप्त करना राजनीतिक क्राउडफंडिंग कहलाती है। वर्तमान लोकसभा चुनाव 2019 हेतु चुनाव प्रचार तथा धन इकट्ठा करने की इस प्रवृत्ति पर काफी जोर दिया गया है। इसी के माध्‍यम से सीपीआई उम्मीदवार कन्हैया कुमार द्वारा ₹70 लाख रूपए जुटाने में कामयाबी हासिल की गई है। इस प्लेटफार्म का सर्वाधिक उपयोग आम आदमी पार्टी तथा सीपीआई के उम्मीदवारों द्वारा किया जा रहा है। बसपा, राजद तथा कांग्रेस पार्टी भी क्राउडफंडिग के माध्‍यम से धन इकट्ठा करने में कहीं पीछे नहीं है।

राजनीतिक क्राउडफंडिंग का प्रयोग करते हुए वाराणसी से मोदी के खिलाफ खड़े हुए पूर्व सैनिक तेज बहादुर यादव द्वारा अभी तक ₹9100/- रुपए ही प्राप्त करने में सफलता हासिल की गई है। इसी के माध्यम से नागपुर से भाजपा के उम्मीदवार नितिन गडकरी के विपक्ष में खड़े कांग्रेसी उम्मीदवार नाना पटोले द्वारा करीब ₹81000/- रूपए की राशि जुटाने में कामयाबी हासिल की गई है।

 


 

देश में सर्वप्रथम आम आदमी पार्टी द्वारा राजनीतिक क्राउडफंडिंग की शुरुआत की थी। उनके द्वारा अपनी वेबसाइट तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऑनलाइन चंदा इकट्ठा करने की शुरुआत की गई थी।

देश में वर्तमान समय में क्राउडफंडिंग प्लेटफार्म का चलन बढ़ गया है। इन प्लेटफार्मों के द्वारा चुनाव में खड़े होने वाले उम्मीदवारों को फंड इकट्ठा करने में मदद की जाती है। इसी प्लेटफार्म में से वर्तमान में देश में अवरडेमोक्रेसी नामक प्लेटफार्म काफी चर्चा में है। इस प्लेटफार्म पर 65 से अधिक फंडरेजिंग कैंपेन चलाए जा रहे हैं। इस प्लेटफार्म पर करीब 9400 दानदाता अपने पूर्ण विवरण के साथ रजिस्टर्ड हैं तथा उनके द्वारा अभी तक करीब 2 करोड रुपए दान किए जा चुके हैं।

यह प्लेटफॉर्म लोगों को ऑनलाइन चंदा इकट्ठा करने में मदद करता है, इस पोटर्ल पर जाने के बाद लोगों को अपने आप को यहॉं रजिस्‍टर्ड करना होता है तथा उसके बाद अपना उद्देश्य बताया जाकर आसानी से फंड इकट्ठा किया जा सकता है। इस प्‍लेटफार्म की सुरूआत पत्रकार बिलाल जैदी तथा आनंद मंगनाले द्वारा की गई थी।

Source:- bhaskarhindi.com


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